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mahabharat 7.20.48: उस समय युद्धस्थल में बहुत से हाथी तोमर, ऋष्टि और कुल्हाड़ियों के प्रहार से घायल होकर पीड़ा से चिल्लाते हुए भूमि पर गिर पड़े।   |   mahabharat अध्याय 7.20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  7.20.48 
ताडितास्ताडॺमानाश्च तोमरर्ष्टिपरश्वधै:।
पेतुरार्तस्वनं कृत्वा तदा विशसने गजा:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
उस समय युद्धस्थल में बहुत से हाथी तोमर, ऋष्टि और कुल्हाड़ियों के प्रहार से घायल होकर पीड़ा से चिल्लाते हुए भूमि पर गिर पड़े।
 
At that time many elephants on the battlefield, being wounded by the blows of tomar, rishti and axes, fell on the ground crying in pain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)