श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  7.20.47 
हतान् परिवहन्तश्च पतितान् पतितायुधान्।
दिशो जग्मुर्महानागा: केचिदेकचरा इव॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
बहुत से बड़े-बड़े हाथी अपनी पीठ पर मृत और शस्त्रहीन सवारों को लादे हुए, हाथियों के एकाकी राजाओं के समान सब दिशाओं में घूम रहे थे ॥47॥
 
Many large elephants, carrying on their backs dead and weaponless riders, were moving in all directions like solitary kings of elephants. ॥47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)