श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  7.20.44 
प्रतीपा: क्रियमाणाश्च वारणा वरवारणै:।
उन्मथ्य पुनराजग्मु: प्रेरिता: परमाङ्कुशै:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
शत्रु के श्रेष्ठतम हाथियों ने अनेक हाथी घायल होकर युद्धभूमि से भगा दिए। महावतों ने अपने उत्कृष्ट अंकुशों से उन्हें भगाया, तो वे अपनी ही सेना को रौंदते हुए पुनः लौट आए।
 
Many elephants were wounded and driven away from the battlefield by the enemy's best elephants. They returned again trampling their own army when they were driven by the mahouts with their excellent goads.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)