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mahabharat 7.20.43: वहाँ कुछ हाथी दूसरे हाथियों के दाँतों से घायल होकर, विपत्तिकाल में बादलों के समान भयंकर चिंघाड़ रहे थे ॥ 43॥   |   mahabharat अध्याय 7.20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  7.20.43 
विषाणाभिहताश्चापि केचित् तत्र गजा गजै:।
चक्रुरार्तस्वनं घोरमुत्पातजलदा इव॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ कुछ हाथी दूसरे हाथियों के दाँतों से घायल होकर, विपत्तिकाल में बादलों के समान भयंकर चिंघाड़ रहे थे ॥ 43॥
 
Some elephants there, having been wounded by the tusks of other elephants, were making terrifying cries, like the clouds during a calamity. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)