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mahabharat 7.20.38: वे एक दूसरे को एक दूसरे से सटाकर खींचते थे। उनके दाँत टकराने से धुआँ निकलता था और अग्नि के समान एक वस्तु निकलती थी॥38॥   |   mahabharat अध्याय 7.20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  7.20.38 
तेषां संसक्तगात्राणां कर्षतामितरेतरम्।
दन्तसंघातसंघर्षात् सधूमोऽग्निरजायत॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
वे एक दूसरे को एक दूसरे से सटाकर खींचते थे। उनके दाँत टकराने से धुआँ निकलता था और अग्नि के समान एक वस्तु निकलती थी॥38॥
 
They would pull each other by pressing their bodies against each other. As their teeth clashed, a fire like thing would rise with smoke.॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)