श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.20.35 
तत्प्रकीर्णपताकानां रथवारणवाजिनाम्।
बलाकाशबलाभ्राभं ददृशे रूपमाहवे॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
उस युद्धस्थल में रथ, हाथी और घोड़े अपनी फड़फड़ाती हुई ध्वजाओं के साथ सारसों की पंक्तियों से युक्त बादलों के समान प्रतीत हो रहे थे।
 
On that battlefield, the chariots, elephants and horses with their fluttering banners appeared like clouds dotted with rows of cranes. 35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)