Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.20.33: हे मनुष्यों के स्वामी! उस समय लोग मित्र और शत्रु में भेद नहीं कर सकते थे। युद्ध केवल अनुमान के आधार पर या नाम बताकर तथा मित्र और शत्रु का विचार करके लड़ा जाता था। 33. | mahabharat अध्याय 7.20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे मनुष्यों के स्वामी! उस समय लोग मित्र और शत्रु में भेद नहीं कर सकते थे। युद्ध केवल अनुमान के आधार पर या नाम बताकर तथा मित्र और शत्रु का विचार करके लड़ा जाता था। 33.
Lord of men! At that time, people could not distinguish between friends and foes. The war was fought based on mere guesswork or by telling names and considering friend and foe. 33.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥