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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार
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श्लोक 31
श्लोक
7.20.31
अनिलेन यथाभ्राणि विच्छिन्नानि समन्तत:।
तथा पार्थस्य सैन्यानि विच्छिन्नानि क्वचित् क्वचित्॥ ३१॥
अनुवाद
जैसे वायु के वेग से बादल फट जाते हैं, उसी प्रकार युधिष्ठिर की सेनाएँ भी इधर-उधर बिखर गईं ॥31॥
Just as clouds are torn apart by the force of the wind, in the same manner Yudhishthira's armies were also scattered here and there. ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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