श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.20.30 
तयोर्विषक्तयो: संख्ये पाञ्चाल्यकुरुमुख्ययो:।
द्रोणो यौधिष्ठिरं सैन्यं बहुधा व्यधमच्छरै:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जब पांचाल के दोनों राजकुमार तथा कुरुवंश के प्रमुख योद्धा युद्ध में पूरी तरह तल्लीन थे, उसी समय द्रोणाचार्य ने अपने बाणों की वर्षा से युधिष्ठिर की सेना को अनेक प्रकार से तहस-नहस कर दिया।
 
When the two princes of the Panchalas and the chief warriors of the Kuru clan were fully engrossed in the war, at that very time Dronacharya devastated Yudhishthira's army in many ways with his shower of arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)