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mahabharat 7.20.29: द्रोणाचार्य को रुका हुआ देखकर आपके पुत्र ने बहुत प्रयत्न किया और नाना प्रकार के बाणों से धृष्टद्युम्न को मोहित करने लगा।   |   mahabharat अध्याय 7.20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  7.20.29 
द्रोणमावारितं दृष्ट्वा भृशायस्तस्तवात्मज:।
नानालिङ्गै: शरव्रातै: पार्षतं सममोहयत्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य को रुका हुआ देखकर आपके पुत्र ने बहुत प्रयत्न किया और नाना प्रकार के बाणों से धृष्टद्युम्न को मोहित करने लगा।
 
Seeing that Dronacharya was stopped, your son tried very hard and began to enchant Dhrishtadyumna with various kinds of arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)