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mahabharat 7.20.28: धृष्टद्युम्न ने शीघ्रतापूर्वक अपने बाणों के जाल से दुर्मुख को ढक लिया और अपने विशाल बाणों के समूह से द्रोणाचार्य को आगे बढ़ने से रोक दिया ॥28॥   |   mahabharat अध्याय 7.20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.20.28 
पार्षत: शरजालेन क्षिप्रं प्रच्छाद्य दुर्मुखम्।
भारद्वाजं शरौघेण महता समवारयत्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
धृष्टद्युम्न ने शीघ्रतापूर्वक अपने बाणों के जाल से दुर्मुख को ढक लिया और अपने विशाल बाणों के समूह से द्रोणाचार्य को आगे बढ़ने से रोक दिया ॥28॥
 
Dhrishtadyumna quickly covered Durmukh with his web of arrows and stopped Dronacharya from moving forward with his great mass of arrows. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)