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mahabharat 7.20.25: जिनके दर्शन मात्र से दुर्भाग्य का सूचक था, धृष्टद्युम्न को अपने सामने खड़ा देखकर द्रोणाचार्य क्षण भर में अत्यंत दुःखी और उदास हो गये।   |   mahabharat अध्याय 7.20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.20.25 
अनिष्टदर्शनं दृष्ट्वा धृष्टद्युम्नमवस्थितम्।
क्षणेनैवाभवद् द्रोणो नातिहृष्टमना इव॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जिनके दर्शन मात्र से दुर्भाग्य का सूचक था, धृष्टद्युम्न को अपने सामने खड़ा देखकर द्रोणाचार्य क्षण भर में अत्यंत दुःखी और उदास हो गये।
 
Seeing Dhrishtadyumna, whose mere sight was a harbinger of misfortune, standing before him, Dronacharya became extremely unhappy and sad in a moment. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)