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mahabharat 7.20.23: हे कुरुपुत्र! जब तक मैं जीवित हूँ, तुम्हें किसी प्रकार का भय नहीं होना चाहिए। द्रोणाचार्य मुझे युद्धभूमि में नहीं हरा सकते।   |   mahabharat अध्याय 7.20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.20.23 
मयि जीवति कौरव्य नोद्वेगं कर्तुमर्हसि।
न हि शक्तो रणे द्रोणो विजेतुं मां कथंचन॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुपुत्र! जब तक मैं जीवित हूँ, तुम्हें किसी प्रकार का भय नहीं होना चाहिए। द्रोणाचार्य मुझे युद्धभूमि में नहीं हरा सकते।
 
O son of Kuru! You should not have any fear as long as I am alive. Dronacharya cannot defeat me in the battlefield. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)