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mahabharat 7.20.22: धृष्टद्युम्न ने कहा- हे उत्तम व्रतों का पालन करने वाले राजन! द्रोणाचार्य कितना भी प्रयत्न करें, आप उनके वश में नहीं होंगे। आज मैं अपने सेवकों सहित द्रोणाचार्य को रोक लूँगा।   |   mahabharat अध्याय 7.20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.20.22 
धृष्टद्युम्न उवाच
द्रोणस्य यतमानस्य वशं नैष्यसि सुव्रत।
अहमावारयिष्यामि द्रोणमद्य सहानुगम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
धृष्टद्युम्न ने कहा- हे उत्तम व्रतों का पालन करने वाले राजन! द्रोणाचार्य कितना भी प्रयत्न करें, आप उनके वश में नहीं होंगे। आज मैं अपने सेवकों सहित द्रोणाचार्य को रोक लूँगा।
 
Dhrishtadyumna said— O King who observes the best vows! No matter how much effort Dronacharya makes, you will not be under his control. Today, I will stop Dronacharya along with my servants.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)