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mahabharat 7.20.16-17h: राजन्! उस दल के मध्य में, सुसज्जित हाथी पर सवार होकर, प्राग्ज्योतिषपुर के राजा भगदत्त क्षितिज पर चमकते हुए सूर्यदेव के समान शोभायमान हो रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  7.20.16-17h 
तस्य प्राग्ज्योतिषो मध्ये विधिवत् कल्पितं गजम्॥ १६॥
आस्थित: शुशुभे राजन्नंशुमानुदये यथा।
 
 
अनुवाद
राजन्! उस दल के मध्य में, सुसज्जित हाथी पर सवार होकर, प्राग्ज्योतिषपुर के राजा भगदत्त क्षितिज पर चमकते हुए सूर्यदेव के समान शोभायमान हो रहे थे।
 
King! In the centre of that formation, riding on a properly decorated elephant, King Bhagadatta of Pragjyotishpur was looking as graceful as the Sun God shining on the horizon.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)