श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  7.20.11-12h 
पुच्छे वैकर्तन: कर्ण: सपुत्रज्ञातिबान्धव:॥ ११॥
महत्या सेनया तस्थौ नानाजनपदोत्थया।
 
 
अनुवाद
विकर्तन का पुत्र कर्ण अपने पुत्र, अपने जातिबंधुओं, कुटुम्बियों तथा नाना देशों से आई हुई विशाल सेना के साथ पूँछ भाग में खड़ा था। 11 1/2॥
 
Karna, the son of Vikartan, was standing in the tail section along with his son, his caste brothers and his family members and a huge army from different countries. 11 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)