श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 20: द्रोणाचार्यके द्वारा गरुड़व्यूहका निर्माण, युधिष्ठिरका भय, धृष्टद्युम्नका आश्वासन, धृष्टद्युम्न और दुर्मुखका युद्ध तथा संकुल युद्धमें गजसेनाका संहार  »  श्लोक 1-3
 
 
श्लोक  7.20.1-3 
संजय उवाच
परिणाम्य निशां तां तु भारद्वाजो महारथ:।
उक्त्वा सुबहु राजेन्द्र वचनं वै सुयोधनम्॥ १॥
विधाय योगं पार्थेन संशप्तकगणै: सह।
निष्क्रान्ते च तदा पार्थे संशप्तकवधं प्रति॥ २॥
व्यूढानीकस्ततो द्रोण: पाण्डवानां महाचमूम्।
अभ्ययाद् भरतश्रेष्ठ धर्मराजजिघृक्षया॥ ३॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - राजन! महारथी द्रोणाचार्य ने उस रात दुर्योधन से बातचीत करके संशप्तकों के साथ अर्जुन के युद्ध की योजना बनाई। हे भरतश्रेष्ठ! जब अर्जुन संशप्तकों का वध करने के लिए बहुत दूर चले गए, तब सेना की व्यूह रचना करके द्रोणाचार्य ने धर्मराज युधिष्ठिर को पकड़ने के लिए पाण्डवों की विशाल सेना पर आक्रमण किया।॥1-3॥
 
Sanjaya says - King! Maharathi Dronacharya spent that night talking to Duryodhan and arranged for Arjuna's war with Samshaptakas. O best of Bharatas! When Arjuna went far away to kill Samshaptakas, then after forming the army's battle formation Dronacharya attacked the huge army of Pandavas to capture Dharmaraja Yudhishthira.॥1-3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)