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mahabharat 7.2.22: कौरवों की रक्षा और पाण्डवों का वध करने की इच्छा से मैं अपने प्राणों की भी परवाह न करते हुए इस भयंकर युद्ध में अपने समस्त शत्रुओं का नाश कर दूँगा तथा सम्पूर्ण राज्य दुर्योधन को सौंप दूँगा।'   |   mahabharat अध्याय 7.2: कर्णकी रणयात्रा   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.2.22 
कुरून् रक्षन् पाण्डुपुत्राञ्जिघांसं-
स्त्यक्त्वा प्राणान् घोररूपे रणेऽस्मिन्।
सर्वान् संख्ये शत्रुसंघान् निहत्य
दास्याम्यहं धार्तराष्ट्राय राज्यम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
कौरवों की रक्षा और पाण्डवों का वध करने की इच्छा से मैं अपने प्राणों की भी परवाह न करते हुए इस भयंकर युद्ध में अपने समस्त शत्रुओं का नाश कर दूँगा तथा सम्पूर्ण राज्य दुर्योधन को सौंप दूँगा।'
 
Desiring to protect the Kauravas and kill the Pandavas, I shall, without caring even for my life, destroy all my enemies in this terrifying war and hand over the entire kingdom to Duryodhana.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)