Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.2.11: इस क्षणभंगुर संसार में जहाँ मनुष्य सदैव मृत्यु की ओर दौड़ता रहता है, बहुत विचार करने पर भी मुझे कुछ भी स्थायी नहीं दिखाई देता। अन्यथा कौरवों में श्रेष्ठ, पर्वत के समान तेजस्वी भीष्म, आप जैसे वीर योद्धाओं के सामने कैसे मारे गए?॥ 11॥ | mahabharat अध्याय 7.2: कर्णकी रणयात्रा । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस क्षणभंगुर संसार में जहाँ मनुष्य सदैव मृत्यु की ओर दौड़ता रहता है, बहुत विचार करने पर भी मुझे कुछ भी स्थायी नहीं दिखाई देता। अन्यथा कौरवों में श्रेष्ठ, पर्वत के समान तेजस्वी भीष्म, आप जैसे वीर योद्धाओं के सामने कैसे मारे गए?॥ 11॥
In this temporary world where one is always running towards death, even after much contemplation, I do not see anything permanent. Otherwise, how was the best of the Kurus, Bhishma, who shone like a mountain, killed in the presence of valiant warriors like you?॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥