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mahabharat 7.199.d4: पाण्डुपुत्र भीमसेन जोर-जोर से शंख बजाते और ताली बजाते हुए आगे बढ़े, जिससे सारी पृथ्वी हिल गई और आपकी सेना भयभीत हो गई।   |   mahabharat अध्याय 7.199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक d4
 
 
श्लोक  7.199.d4 
(कम्पयन् मेदिनीं सर्वां त्रासयंश्च चमूं तव।
शङ्खशब्दं महत् कृत्वा भुजशब्दं च पाण्डव:॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुपुत्र भीमसेन जोर-जोर से शंख बजाते और ताली बजाते हुए आगे बढ़े, जिससे सारी पृथ्वी हिल गई और आपकी सेना भयभीत हो गई।
 
Bhima, son of Pandu, went forward, blowing his conch loudly and clapping his arms, shaking the entire earth and frightening your army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)