श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक d3h-41
 
 
श्लोक  7.199.d3h-41 
निक्षेप्स्यन्ति च शस्त्राणि वाहनेभ्योऽवरुह्य ये।
(येऽञ्जलिं कुर्वते वीरा नमन्ति च विवाहना:।)
तान्नैतदस्त्रं संग्रामे निहनिष्यति मानवान्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
यह अस्त्र युद्धभूमि में उन लोगों को नहीं मारेगा जो अपने वाहनों से उतरकर हथियार डाल देंगे तथा उन वीरों को भी नहीं मारेगा जिनके पास वाहन नहीं हैं और जो हाथ जोड़कर इसे प्रणाम करेंगे।
 
This weapon will not kill those people in the battle-field who will dismount from their vehicles and lay down their weapons and those brave people without vehicles who will fold their hands and salute it.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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