श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.199.8 
तच्छ्रुत्वा तव पुत्रस्तु वाहिनीं पर्यवर्तयत्।
सिंहनादेन महता व्यपोह्य सुमहद् भयम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर आपके पुत्र ने बड़े जोर से गर्जना करके अपनी सेना का महान भय दूर किया और फिर उन्हें वापस भेज दिया ॥8॥
 
On hearing this, your son dispelled the great fear of his army by roaring loudly and then sent them back. ॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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