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श्लोक 7.199.63  |
हाहाकृतानि भूतानि पाण्डवाश्च विशेषत:।
भीमसेनमपश्यन्त तेजसा संवृतं तथा॥ ६३॥ |
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| अनुवाद |
| तब समस्त प्राणी, विशेषतः पाण्डवगण, हाहाकार करने लगे और उन्होंने देखा कि भीमसेन उस अस्त्र के तेज से आच्छादित हो गए हैं ॥63॥ |
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| Then all the creatures, especially the Pandavas, started crying. They saw that Bhimsen was covered with the brilliance of that weapon. 63॥ |
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इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि नारायणास्त्रमोक्षपर्वणि पाण्डवसैन्यास्त्रत्यागे नवनवत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १९९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत नारायणास्त्रमोक्षपर्वमें पाण्डव-सेनाका अस्त्र-त्यागविषयक एक सौ निन्यानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १९९॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ६७ १/२ श्लोक हैं।) |
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