श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  7.199.58 
तस्य रूपमभूद् राजन् भीमसेनस्य संयुगे।
खद्योतैरावृतस्येव पर्वतस्य दिनक्षये॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
राजन! उस समय युद्धस्थल में भीमसेन का रूप संध्या के समय जुगनुओं से भरे हुए पर्वत के समान दिखाई दे रहा था।
 
King! At that time on the battlefield, Bhimasena's form appeared like a mountain filled with fireflies at dusk. 58.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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