Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.199.57: युद्धस्थल में वे बाण प्रज्वलित मुख वाले सर्पों के समान अग्नि उगल रहे थे; कुन्तीपुत्र भीमसेन उनसे इस प्रकार आच्छादित थे मानो उन पर स्वर्णमयी चिंगारियाँ पड़ रही हों ॥57॥ | mahabharat अध्याय 7.199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युद्धस्थल में वे बाण प्रज्वलित मुख वाले सर्पों के समान अग्नि उगल रहे थे; कुन्तीपुत्र भीमसेन उनसे इस प्रकार आच्छादित थे मानो उन पर स्वर्णमयी चिंगारियाँ पड़ रही हों ॥57॥
On the battlefield those arrows were spewing fire like serpents with blazing mouths; Bhima, the son of Kunti, was covered by them as if golden sparks were falling on him. ॥ 57॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥