श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  7.199.55 
स एनमिषुजालेन लघुत्वाच्छीघ्रविक्रम:।
निमेषमात्रेणासाद्य कुन्तीपुत्रोऽभ्यवाकिरत्॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीपुत्र भीमसेन ने बड़ी शीघ्रता से अपना पराक्रम प्रदर्शित करते हुए पलक झपकते ही अश्वत्थामा के पास पहुंचकर उसे अपने बाणों के जाल से ढक दिया।
 
Bhimasena, the son of Kunti, who displayed his valour very quickly, reached Ashwatthama in the blink of an eye and swiftly covered him with a net of his arrows.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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