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mahabharat 7.199.53: अर्जुन बोले - भैया भीमसेन ! नारायणास्त्र, गौ और ब्राह्मण - इनके आगे गाण्डीव धनुष रख दिया जाय; यही मेरा उत्तम व्रत है ॥53॥   |   mahabharat अध्याय 7.199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  7.199.53 
अर्जुन उवाच
भीम नारायणास्त्रे मे गोषु च ब्राह्मणेषु च।
एतेषु गाण्डिवं न्यस्यमेतद्धि व्रतमुत्तमम्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले - भैया भीमसेन ! नारायणास्त्र, गौ और ब्राह्मण - इनके आगे गाण्डीव धनुष रख दिया जाय; यही मेरा उत्तम व्रत है ॥53॥
 
Arjun said – Brother Bhimsen! Narayanastra, cow and brahmin – the Gandiva bow should be put down in front of them; This is my best fast. 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)