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mahabharat 7.199.52: "अर्जुन! अर्जुन! नीच! तू भी अपना गाण्डीव धनुष नीचे न फेंक; अन्यथा तू भी चन्द्रमा के समान कलंकित हो जाएगा और तेरी पवित्रता नष्ट हो जाएगी।" ॥52॥   |   mahabharat अध्याय 7.199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  7.199.52 
अर्जुनार्जुन बीभत्सो न न्यस्यं गाण्डिवं त्वया।
शशाङ्कस्येव ते पङ्को नैर्मल्यं पातयिष्यति॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
"अर्जुन! अर्जुन! नीच! तू भी अपना गाण्डीव धनुष नीचे न फेंक; अन्यथा तू भी चन्द्रमा के समान कलंकित हो जाएगा और तेरी पवित्रता नष्ट हो जाएगी।" ॥52॥
 
"Arjuna! Arjuna! Vile! You too should not throw down your Gandiva bow; otherwise you too will be tainted like the moon and it will destroy your purity." ॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)