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mahabharat 7.199.51: यदि अब तक कोई दूसरा योद्धा इस नारायणास्त्र का सामना नहीं कर सका है, तो आज मैं कौरवों और पाण्डवों के सामने इसका सामना करूँगा॥ 51॥   |   mahabharat अध्याय 7.199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  7.199.51 
यदि नारायणास्त्रस्य प्रतियोद्धा न विद्यते।
अद्यैतत् प्रतियोत्स्यामि पश्यत्सु कुरुपाण्डुषु॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
यदि अब तक कोई दूसरा योद्धा इस नारायणास्त्र का सामना नहीं कर सका है, तो आज मैं कौरवों और पाण्डवों के सामने इसका सामना करूँगा॥ 51॥
 
If till now no other warrior has been able to face this Narayanastra, then today I shall face it in front of the Kauravas and the Pandavas.॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)