श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  7.199.48 
पश्यतेमौ हि मे बाहू नागराजकरोपमौ।
समर्थौ पर्वतस्यापि शैशिरस्य निपातने॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
मेरी भुजाओं को देखो, जो हाथी की सूँड़ के समान मोटी हैं; वे हिमालय को भी कुचलने में समर्थ हैं॥ 48॥
 
‘Look at my arms which are as thick as the trunks of an elephant; they are capable of crushing even the Himalayas.॥ 48॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd