श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  7.199.47 
न हि मे विक्रमे तुल्य: कश्चिदस्ति पुमानिह।
यथैव सवितुस्तुल्यं ज्योतिरन्यन्न विद्यते॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में मेरे पराक्रम की बराबरी करनेवाला कोई दूसरा पुरुष नहीं है। जैसे सूर्य के समान कोई दूसरा तेजोमय ग्रह नहीं है॥47॥
 
‘There is no other person in this world who can match my prowess. Just like there is no other luminous planet like the Sun.॥ 47॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd