श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  7.199.45 
न कथंचन शस्त्राणि मोक्तव्यानीह केनचित्।
अहमावारयिष्यामि द्रोणपुत्रास्त्रमाशुगै:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
किसी भी परिस्थिति में किसी भी योद्धा को अपने हथियार नहीं डालने चाहिए। मैं अपने तीव्र बाणों से द्रोणपुत्र के अस्त्रों को नष्ट कर दूँगा।
 
No warrior should lay down his arms under any circumstances. I will ward off the weapons of Drona's son with my swift arrows. 45.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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