श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  7.199.43 
ते वचस्तस्य तच्छ्रुत्वा वासुदेवस्य भारत।
ईषु: सर्वे समुत्स्रष्टुं मनोभि: करणेन च॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
भगवान् वासुदेवजी के ये वचन सुनकर समस्त योद्धाओं ने अपनी इन्द्रियों और मनसहित अपने शस्त्रों का त्याग करने का निश्चय किया॥43॥
 
India Hearing these words of Lord Vasudev, all the warriors decided to give up their weapons, along with their other senses and mind. 43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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