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mahabharat 7.199.42: जो कोई मन से भी इस अस्त्र का सामना करेगा, चाहे वे पाताल लोक में भी क्यों न गए हों, यह अस्त्र वहाँ पहुँचकर उन सबको मार डालेगा।॥42॥   |   mahabharat अध्याय 7.199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  7.199.42 
ये त्वेतत्प्रतियोत्स्यन्ति मनसापीह केचन।
निहनिष्यति तान् सर्वान् रसातलगतानपि॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
जो कोई मन से भी इस अस्त्र का सामना करेगा, चाहे वे पाताल लोक में भी क्यों न गए हों, यह अस्त्र वहाँ पहुँचकर उन सबको मार डालेगा।॥42॥
 
Whoever faces this weapon even with his mind, even if they have gone to the underworld, this weapon will reach there and kill them all.'॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)