श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  7.199.37 
एवं ब्रुवति कौन्तेये दाशार्हस्त्वरितस्तत:।
निवार्य सैन्यं बाहुभ्यामिदं वचनमब्रवीत्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
जब कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर ऐसा कह रहे थे, उसी समय दशार्हवंशी रत्न भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दोनों भुजाओं से संकेत करके सारी सेना को रोक दिया और इस प्रकार कहा -॥37॥
 
When Kunti's son Yudhishthira was saying this, at that very moment Lord Krishna, the jewel of the Dasarha clan, stopped the entire army by signalling with his two arms and said thus -॥ 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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