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mahabharat 7.199.34: ब्रह्मास्त्र को जानने वाले आचार्यदेव ने मेरी विजय के लिए प्रयत्न करने वाले सत्यजित् आदि पांचालवीरों का पूर्णतः नाश कर दिया॥34॥   |   mahabharat अध्याय 7.199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  7.199.34 
येन ब्रह्मास्त्रविदुषा पञ्चाला: सत्यजिन्मुखा:।
कुर्वाणा मज्जये यत्नं समूला विनिपातिता:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मास्त्र को जानने वाले आचार्यदेव ने मेरी विजय के लिए प्रयत्न करने वाले सत्यजित् आदि पांचालवीरों का पूर्णतः नाश कर दिया॥34॥
 
‘Acharyadev, who knew the Brahmastra, completely destroyed the Panchalveers like Satyajit and others who were trying for my victory. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)