श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  7.199.32 
येनाविब्रुवता प्रश्नं तथा कृष्णा सभां गता।
उपेक्षिता सपुत्रेण दासभावं नियच्छती॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
जिन्होंने अपने पुत्रों सहित द्रौपदी के प्रति उदासीनता दिखाई थी, जब उसे सभा में लाया गया था, तब उसके प्रश्नों का उत्तर न देकर, उस समय वह बेचारी हमारी दासता का भाव दूर करने का प्रयत्न कर रही थी॥ 32॥
 
Those who, along with their sons, showed indifference towards Draupadi by not answering her questions when she was brought to the assembly, at that time the poor lady was trying to get rid of our sense of servitude.॥ 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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