श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.199.27 
वासुदेवोऽपि धर्मात्मा करिष्यत्यात्मन: क्षमम्।
श्रेयो ह्यपदिशत्येष लोकस्य किमुतात्मन:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
धर्मात्मा भगवान श्रीकृष्ण भी अपने लिए जो उचित समझते हैं, वही करते हैं। वे सम्पूर्ण जगत् को कल्याण का उपदेश देते हैं, फिर वे अपना कल्याण क्यों नहीं करेंगे?॥27॥
 
‘The righteous Lord Shri Krishna will also do whatever he deems fit for himself. He preaches welfare to the entire world, then why will he not do good for himself?॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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