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mahabharat 7.199.25: जब उन्होंने अपनी सेना को अचेत होकर भागते हुए और कुन्तीपुत्र अर्जुन को तटस्थ भाव से खड़ा देखा, तब उन्होंने यह कहा- ॥25॥   |   mahabharat अध्याय 7.199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.199.25 
द्रवमाणं तु तत् सैन्यं दृष्ट्वा विगतचेतनम्।
मध्यस्थतां च पार्थस्य धर्मपुत्रोऽब्रवीदिदम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जब उन्होंने अपनी सेना को अचेत होकर भागते हुए और कुन्तीपुत्र अर्जुन को तटस्थ भाव से खड़ा देखा, तब उन्होंने यह कहा- ॥25॥
 
When he saw his army fleeing unconsciously and Kunti's son Arjun standing with a neutral expression, then he said this - ॥25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)