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mahabharat 7.199.24: महाराज! जब वह अस्त्र सब ओर फैल गया और पाण्डव सेना उससे दुर्बल होने लगी, तब धर्मपुत्र युधिष्ठिर अत्यन्त भयभीत हो गये।   |   mahabharat अध्याय 7.199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.199.24 
आपूर्यमाणेनास्त्रेण सैन्ये क्षीयति च प्रभो।
जगाम परमं त्रासं धर्मपुत्रो युधिष्ठिर:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जब वह अस्त्र सब ओर फैल गया और पाण्डव सेना उससे दुर्बल होने लगी, तब धर्मपुत्र युधिष्ठिर अत्यन्त भयभीत हो गये।
 
King! When that weapon spread everywhere and the Pandava army started getting weakened by it, then Dharmaputra Yudhishthira became very afraid.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)