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mahabharat 7.199.23: हे प्रभु! जैसे शीत ऋतु बीत जाने पर ग्रीष्म ऋतु में प्रज्वलित अग्नि सूखी लकड़ी या वन को जला देती है, उसी प्रकार वह अस्त्र पाण्डव सेना को भस्म करने लगा॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 7.199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.199.23 
यथा हि शिशिरापाये दहेत् कक्षं हुताशन:।
तथा तदस्त्रं पाण्डूनां ददाह ध्वजिनीं प्रभो॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! जैसे शीत ऋतु बीत जाने पर ग्रीष्म ऋतु में प्रज्वलित अग्नि सूखी लकड़ी या वन को जला देती है, उसी प्रकार वह अस्त्र पाण्डव सेना को भस्म करने लगा॥ 23॥
 
O Lord! Just as a fire lit in the summer after the winter has passed burns dry wood or a forest, in the same way that weapon began to consume the Pandava army.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)