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mahabharat 7.199.22: उस नारायणास्त्र से घायल हुए सैनिक युद्धभूमि में इस प्रकार तड़पने लगे मानो वे सब ओर से अग्नि में जल रहे हों ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 7.199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.199.22 
वध्यमानास्तदास्त्रेण तेन नारायणेन वै।
दह्यमानानलेनेव सर्वतोऽभ्यर्दिता रणे॥ २२॥
 
 
अनुवाद
उस नारायणास्त्र से घायल हुए सैनिक युद्धभूमि में इस प्रकार तड़पने लगे मानो वे सब ओर से अग्नि में जल रहे हों ॥22॥
 
The soldiers injured by that Narayanastra suffered on the battlefield as if they were burning in fire from all sides. ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)