श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.199.20 
शस्त्राकृतिभिराकीर्णमतीव पुरुषर्षभ।
दृष्ट्वान्तरिक्षमाविग्ना: पाण्डुपाञ्चालसृञ्जया:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषोत्तम! उस समय आकाश को नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों से पूर्णतया भरा हुआ देखकर पाण्डव, पांचाल और सृंजय योद्धा चिन्तित हो उठे॥20॥
 
Best man! At that time, Pandavas, Panchal and Srinjaya warriors became worried after seeing the sky completely filled with objects in the shape of various weapons. 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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