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mahabharat 7.199.17: महाराज! जैसे सूर्य की किरणें दो घण्टों में ही सम्पूर्ण जगत में फैल जाती हैं, उसी प्रकार उस महायुद्ध में वे बाण समस्त दिशाओं, आकाश और सम्पूर्ण सेना में फैल गये।   |   mahabharat अध्याय 7.199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.199.17 
ते दिश: खं च सैन्यं च समावृण्वन् महाहवे।
मुहूर्ताद् भास्करस्येव लोके राजन् गभस्तय:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जैसे सूर्य की किरणें दो घण्टों में ही सम्पूर्ण जगत में फैल जाती हैं, उसी प्रकार उस महायुद्ध में वे बाण समस्त दिशाओं, आकाश और सम्पूर्ण सेना में फैल गये।
 
King! Just as the rays of the Sun spread across the entire world in just two hours, similarly, in that great war those arrows spread across all directions, the sky and the entire army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)