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mahabharat 7.199.14: जैसे समुद्र मंथन की महान ध्वनि सर्वत्र गूंज रही थी, वैसे ही आपकी सेना का महान कोलाहल भी अद्भुत और अतुलनीय था॥ 14॥   |   mahabharat अध्याय 7.199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.199.14 
यथा निर्मथ्यमानस्य सागरस्य तु नि:स्वन:।
अभवत् तव सैन्यस्य सुमहानद्भुतोपम:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जैसे समुद्र मंथन की महान ध्वनि सर्वत्र गूंज रही थी, वैसे ही आपकी सेना का महान कोलाहल भी अद्भुत और अतुलनीय था॥ 14॥
 
Just as the great sound of the churning ocean reverberated everywhere, so was the great uproar of your army also wonderful and incomparable.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)