श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.199.13 
तत: शङ्खसहस्राणि भेरीणामयुतानि च।
अवादयन्त संहृष्टा: कुरुपाण्डवसैनिका:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् हर्ष में भरकर कौरव और पाण्डव सैनिक हजारों शंख और हजारों युद्ध-तुरही बजाने लगे॥13॥
 
Thereafter, the Kaurava and Pandava soldiers, filled with joy, began blowing thousands of conches and thousands of war trumpets.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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