श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.199.12 
यथा शिलोच्चये शैल: सागरे सागरो यथा।
प्रतिहन्येत राजेन्द्र तथाऽऽसन् कुरुपाण्डवा:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! जैसे एक पर्वत दूसरे पर्वत से और एक समुद्र दूसरे समुद्र से टकराता है, वही स्थिति कौरव और पाण्डव योद्धाओं की थी॥12॥
 
Rajendra! Just as one mountain collides with another mountain and one ocean collides with another ocean, the same was the condition of the Kaurava and Pandava warriors.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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