श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.199.11 
तेषां परमहृष्टानां जयमात्मनि पश्यताम्।
संरब्धानां महावेग: प्रादुरासीद् विशाम्पते॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! वे अपनी विजय को बड़े हर्ष से देख रहे थे। क्रोध से भरे हुए उन सैनिकों का महान बल दिखाई दे रहा था ॥11॥
 
O Prajanath! He was looking at his own victory with great joy. The great force of those soldiers filled with anger was seen. ॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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