श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 198: सात्यकि और धृष्टद्युम्नका परस्पर क्रोधपूर्वक वाग्बाणोंसे लड़ना तथा भीमसेन, सहदेव और श्रीकृष्ण एवं युधिष्ठिरके प्रयत्नसे उनका निवारण  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  7.198.9-10h 
एते त्वां पाण्डवा: सर्वे कुत्सयन्ति विकुत्सया॥ ९॥
कर्मणा तेन पापेन श्वपाकं ब्राह्मणा इव।
 
 
अनुवाद
धृषद्युम्न! जैसे ब्राह्मण चाण्डाल की निन्दा करते हैं, वैसे ही ये सब पाण्डव उस पापकर्म के कारण अत्यन्त घृणा से आपकी निन्दा कर रहे हैं॥9 1/2॥
 
Dhrishadyumna! Just as Brahmins criticize a Chandala, similarly all these Pandavas are criticizing you with extreme disgust due to that sinful act.॥ 9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)