Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.198.63-65h: या फिर अर्जुन ही इन सभी कौरवों को युद्धभूमि में रोकेगा, तब तक मैं भी अपने बाणों से इस सात्यकि का सिर काट डालूँगा। वह भी मुझे युद्धभूमि में कटे हुए हाथ वाला भूरिश्रवा समझ रहा है। तुम उसे छोड़ दो। या तो मैं उसे मार दूँगा या वह मुझे मार देगा।' | mahabharat अध्याय 7.198: सात्यकि और धृष्टद्युम्नका परस्पर क्रोधपूर्वक वाग्बाणोंसे लड़ना तथा भीमसेन, सहदेव और श्रीकृष्ण एवं युधिष्ठिरके प्रयत्नसे उनका निवारण । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथवा फाल्गुन: सर्वान् वारयिष्यति संयुगे॥ ६३॥
अहमप्यस्य मूर्धानं पातयिष्यामि सायकै:।
मन्यते छिन्नबाहुं मां भूरिश्रवसमाहवे॥ ६४॥
उत्सृजैनमहं चैनमेष वा मां हनिष्यति।
अनुवाद
या फिर अर्जुन ही इन सभी कौरवों को युद्धभूमि में रोकेगा, तब तक मैं भी अपने बाणों से इस सात्यकि का सिर काट डालूँगा। वह भी मुझे युद्धभूमि में कटे हुए हाथ वाला भूरिश्रवा समझ रहा है। तुम उसे छोड़ दो। या तो मैं उसे मार दूँगा या वह मुझे मार देगा।'
Or only Arjuna will stop all these Kauravas in the battlefield, till then I too will cut off the head of this Satyaki with my arrows. He also thinks of me as Bhurishrava with a severed arm in the battlefield. You leave him. Either I will kill him or he will kill me.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥